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योगी आदित्यनाथ- भगवा के प्रतीक

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इनकी पीड़ा सिर्फ हाथरस पर शोर मचाना ही नही है। पीड़ा केवल जातिवाद भी नही है। पीड़ा सिर्फ राजनीति भी नही है, बल्कि इनकी पीड़ा इससे भी कहीं अधिक बढ़कर हैं। इनकी मुख्य पीड़ा भगवाधारी योगी हैं। ये स्वीकार ही नही कर पा रहे हैं आखिर भगवा वस्त्र पहना कोई व्यक्ति सत्ता पर आसीन कैसे हो सकता हैं। ये स्वीकार ही नही कर पा रहे आखिर तथाकथित सेक्युलर राष्ट्र में कोई भगवाधारी योगी सत्ता कैसे चला सकता हैं। आप इनकी घृणित मानसिकता का अन्दाजा भी नही लगा नही सकते। जब-जब ये भगवा वस्त्र धारण किये योगी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा देखते हैं, तो इनके तनबदन में आग लग जाती है। ये इतने अधिक कुंठा में आ जाते है कि किसी भी हद को पार कर सकते हैं। क्योंकि भगवा के प्रति इनकी घृणित, नफरती मानसिकता के मुताबिक इन्होंने वर्षो से भगवा को कुचला है। 70 वर्षो तक कांग्रेस ने, 100 वर्षो तक वामपंथ, 200 वर्षो तक वेटिकन, 500 वर्षो तक कट्टरपंथियों ने भगवा को लहूलुहान किया। आज भी जारी हैं। फिर इनके मुताबिक आखिर कैसे एक भगवा वस्त्रधारी सत्तासीन हो सकता है। अतः पिछले तीन वर्षों से विरोधियों का पूरा तंत्र, इकोसिस्टम, नेक्सेस योगी को विभि...

हाथरस उत्तरप्रदेश प्रसंग

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हाथरस उत्तर प्रदेश प्रसंग पर कुछ लिखने का प्रयास किया है … एक ग्रामीण को विवाह के बहुत सालों बाद पुत्र हुआ लेकिन कुछ वर्षों बाद बालक की असमय मृत्यु हो गई…… ग्रामीण शव लेकर श्मशान पहुंचा, वह मोहवश उसे दफना नहीं पा रहा था, उसे पुत्र प्राप्ति के लिए किए जप-तप और पुत्र का जन्मोत्सव याद आ रहा था …… श्मशान में एक गिद्ध और एक सियार रहते थे, दोनों शव देखकर बड़े खुश हुए, दोनों ने प्रचलित व्यवस्था बना रखी थी- दिन में सियार मांस नहीं खाएगा और रात में गिद्ध …… सियार ने सोचा यदि ग्रामीण दिन में ही शव रखकर चला गया तो उस पर गिद्ध का अधिकार होगा, इसलिए क्यों न अंधेरा होने तक ब्राह्मण को बातों में फंसा कर रखा जाए …… वहीं गिद्ध ताक में था कि शव के साथ आए कुटुंब के लोग जल्द से जल्द जाएं और वह उसे खा सके …… गिद्ध ग्रामीण के पास गया और उससे वैराग्य की बातें शुरू की …… गिद्ध ने कहा- हे मनुष्यों, आपके दु:ख का कारण यही मोहमाया ही है, संसार में आने से पहले हर प्राणी का आयु तय हो जाती है, संयोग और वियोग प्रकृति के नियम हैं …… आप अपने पुत्र को वापस नहीं ला सकते, इस लिए शोक त्यागकर प्रस्थान करें, संध्...

श्री लाल बहादुर शास्त्री

#स्वर्गीय_श्री_लालबहादुर_शास्त्री_जी #भारत_के_द्वितीय_प्रधानमंत्री एवं #स्वतंत्रता_सेनानी #लालबहादुर_शास्त्री_जी  (जन्म: 2 अक्टूबर 1904 मुगलसराय (वाराणसी)  मृत्यु: 11 जनवरी 1966 ताशकन्द (सोवियत संघ रूस) भारत के दूसरे प्रधानमन्त्री थे। वह 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 को अपनी मृत्यु तक लगभग अठारह महीने भारत के प्रधानमन्त्री रहे। इस प्रमुख पद पर उनका कार्यकाल अद्वितीय रहा। शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की। भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात #शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। गोविंद बल्लभ पंत के मन्त्रिमण्डल में उन्हें पुलिस एवं परिवहन मन्त्रालय सौंपा गया। परिवहन मन्त्री के कार्यकाल में उन्होंने प्रथम बार महिला संवाहकों (कण्डक्टर्स) की नियुक्ति की थी। पुलिस मन्त्री होने के बाद उन्होंने भीड़ को नियन्त्रण में रखने के लिये लाठी की जगह पानी की बौछार का प्रयोग प्रारम्भ कराया। 1951 में, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में वह अखिल भारत काँग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त किये गये। उन्होंने 1952, 1957 व 1962 के चुनावों में कांग्रेस पा...